हमारे रोजमर्रा के जीवन में भी कई बार ऐसे पल आते है जब हम खुद को कमजोर महसूस करते है। तब हम सोचते है काश कोई हो जो हमें गले से लगाकर कह दे, तुम निराश या मायूस मत हो, होसला मत तोड़ सब कुछ सही होगा। देख मैं खड़ा हूँ ना तेरे साथ।
चंद्रयान 2 चंद्रमा की सतह से लगभग जब दो किलोमीटर की दूरी पर था उसका भारत की स्पेस एजेंसी इसरो से सम्पर्क टूट गया। करीब ग्यारह वर्ष के रात-दिन मेहनत करोड़ों रूपये की लागत और करोड़ों देशवासियों का सपना भी इसी के साथ मानो टूट गया। देश के हजारों वैज्ञानिक इस से कुछ पल को मायूस भी हो गये। मायूसी के इस माहौल में देश के प्रधानमंत्री का इसरो चीफ को गले लगाकर उनकी पीठ थपथापाने वाला पल बेहद भावुक कर देना वाला था।
इस घटना को राजनीती के बजाय एक शिक्षा के रूपमें देखा जा सकता है।
शिक्षा बोर्ड के दसवीं बारहवी के नतीजे आने के बाद हर वर्ष देश में शिक्षकों और अभिभावको की फटकार के कारण न जाने कितने किशोर छात्र-छात्राएं घबराकर, डरकर या अन्य किसी अवसाद के कारण आत्महत्या का रास्ता चुनते है।
केवल शिक्षा ही नहीं व्यापार और खेल जगत में भी कई होनहार युवा असफलता के भय और फटकार के कारण आत्महत्या जैसे रास्ते को चुन लेते है।
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